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Holy River Narmada 

"पवित्र बनी रहे यह जलधारा"
पुण्या कनखले गंगा, कुरूक्षेत्रे सरस्वती। ग्रामे वा यदि वारण्ये, पुण्या सर्वत्र नर्मदा।।

अर्थात् कनखल में गंगा पुण्यदायिनी है, कुरूक्षेत्र में सरस्वती, ग्राम और जंगलों में सर्वत्र नर्मदा पुण्यदायिनी है।

कहा जाता है कि पिछले जन्म में पुण्यकार्य किये होगें तब नर्मदा तट पर निवास का सौभाग्य मिला है। माँ नर्मदा की विपुल जलराशि एवं तटों का सौन्दर्य मन को शांति देता है, हमारे दैनिक कार्यों के लिये नई ऊर्जा का संचार होता है। तटों पर बने मंदिर की घंटियाँ आरती की ध्वनि हमारे जीवन को गतिमान बनाती है, इसलिये प्रातः और सांयकाल माँ नर्मदा के दर्शन से हम धन्य होते है। शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा में स्नान के समान पुण्य माँ नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाता है। माँ नर्मदा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में हमारा कर्त्तव्य बनता है कि हम अपने क्रियाकलापों में माँ नर्मदा की पवित्रता का बनाये रखें। नदी में पूजन सामग्री, पॉलीथिन इत्यादि विसर्जन से प्रदूषण बढ़ता है। किसी भी तरह की सामग्री विसर्जन कर तटों को प्रदूषित न करें। माँ नर्मदा के तटों पर साबुन का उपयोग न करें। मूर्तियों के विसर्जन से हानिकारक केमिकल्स जल को दूषित करते है। हम अपनी आस्थाओं की अभिव्यक्ति में प्रकृति के बनाये नियमों का पालन कर तटों को प्रदूषित होने से बचायें।

 
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